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Sunday, August 21, 2016

अफगानी सैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए निर्भीक कदम उठाये भारत : करज़ई

बतौर अफगानी राष्ट्रपति हामिद करजई को अपना दूसरा व अंतिम कार्यकाल पूरा किए हुए लगभग दो साल हो रहे हैं। लेकिन अफगानी राजनीति में वे अब भी एक प्रमुख शक्ति बने हुए हैं। उन्होंने अंग्रेजी दैनिक इंडियन एक्सप्रेस से पीएम के बलूचिस्तान पर बयानआईएस के खतरे से लेकर कश्मीर की वर्तमान स्थिति पर खुलकर बात की. मैंने इस साक्षात्कार को अनुदित करने की कोशिश की है. ताकि अच्छी सामग्री हिंदी के पाठक तक पहुँच सके. पेश है बातचीत का प्रमुख अंश-

पीएम नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में बलूचिस्तान के बारे बयान दिया है, वह भी लाल किले की प्रचीर से। आपके हिसाब से उनके इस बयान का क्या असर होगा ?

इसका मतलब है कि भारत इस क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता और मानवाधिकारों के बारे में चिंतित है। यह बयान भारत के इस चाह को दर्शाता है कि बलूचिस्तान के लोग भी बेहतर करें। वे बंदूकों के फायरिंग, कट्टरवादी हमले व बमबारी से दूर कष्टरहित सामान्य जीवन जी सकें। बलूचिस्तान हमारे लिए कोई अलग मसला नहीं है। अफगानिस्तान में कट्टवाद वहीं से आता है। बलूचिस्तान हमसे भौगोलिक व मानसिक दोनों रूप से बहुत करीब है। हमें बलूची लोगों की शांति व विकास तक पहुंच सुनिश्चित करनी होगी। यह मानवाधिकर का मामला है जो हर बलूची का अधिकार है।

शायद पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इस मसले पर सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी है। क्या इस वजह से आने वाले दिनों में भारत-पाक सम्बन्धों में बदलाव देखने को मिलेगा?
यह भारतीय उपमहाद्वीप में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा। यह कदम इस क्षेत्र में शांति व स्थिरता कायम करने व राज्य द्वारा नीतिगत तरीके से कट्टरवाद और अतिवाद को उपयोग करने की प्रथा को खत्म करने की दिशा में कारगर साबित होगा। हमें इस दिशा में मिलकर काम करना होगा।

शांति व विकास तक पहुँच हर बलूची का अधिकार है.

आईएस के उदय और इसके परिणाम को आप किस रूप में देखते हैं ? विशेषकर भारत के संदर्भ में भारतीय अधिकारियों से मिलने पर क्या आप इस बारे में बात करते हैं ?

बिल्कुल ! यह मुद्दा भारत और अफगानिस्तान के बीच वार्ता का थीम होता है। रुढ़िवाद और अतिवाद की वजह से जन-धन की भारी हानि हो रही है। भारत को आईएस को गम्भीरता से लेना चाहिए। हमारे क्षेत्र के लिए यह पूर्णतः विदेशी सोच है, अतः हमें मिलकर इससे निबटना चाहिए।

अगर हम भारतीय संदर्भ में देखें तो आईएस बाकीे आतंकी समूहों से अधिक घातक और खूंखार है। ऐसा क्यों?

आईएस आईएस अफगानी मूल का नहीं है और उसका तालिबान से कोई सम्बन्ध नहीं है। अत का उद्देश्य कहीं अधिक घातक है। तालिबान स्थानीय थे। मूलतः अफगानी।  आपको उनसे अत्यधिक सतर्क रहना होगा। आपको उनकी भारत में पहुंच और भारतीय हितों पर कुठाराघात को रोकना ही होगा। जैसा कि अभी वे अफगानिस्तान में कर रहे हैं।

बतौर राष्ट्रपति आपने सैनिक साजो-सामान की वो सूची भारत को सौंपी, जो आप भारत से चाहते हैं। कुछ हेलीकाप्टरों को छोड़कर सूची में शामिल अन्य साजो-सामान भारत अभी तक नहीं दे पाया है। क्या आपको लगता है भारत इस बारे में और अधिक कर सकता है ?

भारत को अफगानिस्तान के सैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए खुलकर सामने आना चाहिए। मैं चाहता हूं कि अफगान सैन्य क्षमता को बढ़ाने के लिए भारत को कड़े कदम उठाए। इसे चमत्कारिक ही कहा जाएगा कि भारत, पाकिस्तान और अमेरिका दोनों के दृष्टिकोण से सहमत दिखता था। मैं चाहता हूं कि भारत अपने हितों और भारत-अफगान सम्बन्धों को ध्यान में रखकर उचित कदम उठाए। वर्तमान सरकार ने कुछ हेलीकाप्टर दिए हैं परन्तु हमें उनसे अधिक अपेक्षा है।

भारत अफगान नेशनल आर्मी को किस तरह के साजो-सामान उपलब्ध करा सकता है ? जिससे उसकी क्षमता को बढ़ाया जा सके?

भारत हमारे सेनाओं की स्थिति को बखूबी जानता है। सैनिक साजो-सामान से लेकर सैन्य प्रशिक्षण तक बहुत सारी चीजें हैं जिनको भारत उपलब्ध करवा सकता है। और ये चीजें भारत के पास हैं भी।

क्या आपको लगता है कि भारत पीएम मोदी के बलूचिस्तान पर बयान के बाद अफगानिस्तान को सैन्य सहायता के दिशा में अपेक्षाकृत अधिक काम कर रहा है?

मैं इस बात को लेकर अत्यधिक आशान्वित हूं कि भारत, अफगानिस्तान और अफगानी सेना के मजबूत करने के लिए और अधिक सहायता उपलब्ध कराएगा। हमें अपने पड़ोसी पाकिस्तान के साथ भी शांतिपूर्ण रिश्ते कायम करने होंगे।

इन दिनों कश्मीर उथल-पुथल से गुजर रहा है। इस पूरे मामले को आप कैसे देखते हैं ?
मैं आशा करता हूं कि वहां शांति स्थापित होगी। वहां खून-खराबा, अशांति व बाहरी हस्तक्षेप बन्द होगा।

इस समय आप पीएम नरेन्द्र मोदी को क्या संदेश देना चाहेंगे ?

अफगानिस्तान के प्रति भारतीय सहयोग के लिए हम उनके आभारी हैं। अफगानिस्तान पर उनका मजबूत स्टैंड, क्षेत्रीय मसलों पर उनके खुले और स्पष्ट विचारों का हम स्वागत करते हैं।
(इस पोस्ट का मकसद उन पाठकों तक क्वालिटी प्रोडक्ट पंहुचाना है जो अंग्रेजी में खुद असहज महसूस करते हैं.पूरा साक्षात्कार पढने के लिए क्लिक करें.)

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