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Sunday, May 21, 2017

क्या होगा 'राष्ट्रवादी पत्रकारिता' के मेन्यू में ?

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नरेन्द्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के साथ ही राष्ट्रवादी पत्रकारिताका गाना गाया जा रहा है. ऐसी किसी भी खबर को दिखाने और प्रसारित करने की निंदा की जाने लगी है जिससे राष्ट्रहितको क्षति पंहुचती हो. पत्रकारिता के इस संकल्पना को मानने वालों पत्रकारोंकी लिस्ट लम्बी हो रही है. अब इसमें सिर्फ उगता भारत, डूबता सूरज जैसे दो टकिया समाचार संस्थान ही नहीं हैं बल्कि जी मीडिया जैसे बड़े घाघ शामिल हो गए हैं. सत्ता की मलाई चाटनी हो तो लोग क्या से क्या कर बैठते हैं जी ने तो सिर्फ राष्ट्रवादी पत्रकारिताको समर्पित जी हिंदुस्तान चैनल ही शुरू किया है.

अब सवाल यह उठता है कि राष्टवादी चैनल औरों से अलग कैसे होंगे? राष्ट्रवादी पत्रकारिता के मेन्यू में क्या होगा? जाहिर है राष्ट्रवाद का आधार गौ, गीता, गंगा और भारतीय संस्कृति है तो राष्ट्रवादी पत्रकारिताइन्हीं स्वर्णआधारों पर काम करेगी. वर्तमान पत्रकारिता और राष्ट्रवादी पत्रकारों की मांगों को देख-समझ कर राष्ट्रवादी पत्रकारिताके स्वरुप का अनुमान लगा रहा हूँ -
  • टीवी चैनलों के एंकर जय श्री रामके साथ कार्यक्रम की शुरूआत करेंगे. माथे पर टीका अनिवार्य होगा. पैनल डिस्कशन के दौरान हर पैनेलिस्ट को अपनी बात भारत माता की जयके साथ शुरू करना होगा और बीच-बीच में इसे दोहराते रहना होगा क्योंकि आज कल लोगों में देश प्रेम की भावना कभी भी गायब हो सकती है. भारत माता की जय का नारा उनको देशद्रोही होने से बचाए रखेगा.
  • सेना के ऊपर कोई भी सवाल नहीं उठाया जाएगा क्योंकि वो भारत माता के सच्चे लालहैं. सेना के सिपाहियों द्वारा किये गए रेप आदि को भारत माता की दूतों का प्रसाद माना जाएगा. इरोम जैसे लोगों को जेल में डालने के लिए सीरीज में कार्यक्रम तैयार किये जाएंगे.
  • गौ और गौ संरक्षण को चैनल अपने पालिसी का कोर बिंदु बनायेंगे. गायों पर विशेष कार्यक्रम बनाए जाएंगे. गायों का हक़ आदमी के हक़ से ज्यादा महत्वपूर्ण होगा. हर हफ्ते न्यूज़रूम की गाय के गोबर से लिपाई होगी. हर पत्रकार को गौ-गोबर से बना साबुन और गौ-मूत्र से बनी सैम्पू लगानी होगी. गंगा पर भी विशेष फोकस होगा. गंगाजल के फायदे बताए जाएंगे. हाँ, गंगा की दुर्दशा पर कोई बात नहीं होगी क्योंकि इससे भाजपा सरकार की किरकिरी हो सकती है.

  •  चूँकि ‘राष्ट्रवादभाजपा की जागीर है इसीलिए उसको छोड़ बाकि सारी पार्टियों को देश हित में काम न करने वाला और विदेशी चंदे से चलने वाला माना जाएगा और इसके पक्ष में किसी भी तरीके से साक्ष्य इकट्ठा किया जाएंगे. भाजपा को देश के प्रत्येक राज्य में लाना पार्टी के साथ राष्ट्रवादीपत्रकारों की जिम्मेवारी होगी. सत्ता पक्ष से ज्यादा वार मृतप्राय विपक्ष पर किया जाएगा. विपक्षी पार्टियों के शासन के दौरान के गड़े मुर्दों को उखाड़ा जाएगा. भाजपा सरकारों की वाह-वाही की जाएगी. राष्ट्रवादी पत्रकार भाजपा हित को ही देशहित मानेंगे.
  • गाय हर प्रकार से समाज के लिए लाभदायक है इसीलिए गाय को मारना बिल्कुल गलत हुआ. इस दृष्टिकोण सेराष्ट्रवादीऔर रामजादोंद्वारा हरामजादोंके ऊपर की गई कार्यवाही को उचित माना जाएगा और भगवाधारियों द्वारा मुसलमानों की हत्या को नहीं दिखाया जाएगा या कम से कम दिखाया जाएगा.  


  • यह भी संभव है कि सबसे ज्यादा मुसलमानों को मारने वालों 'गुदड़ी के लालों' पर विशेष कार्यक्रम बनाये जायें. उनके इंटरव्यू को प्राइम टाइम में दिखाया जाए. ठीक वैसे ही जैसे किसी परीक्षा के टॉपर से उसके सफलता के राज पूछे जाते हैं.
  • किसी भी सूरत में भारत को हारता हुआ नहीं दिखाया जाएगा क्योंकि इससे भारतीयों का मनोबल गिर सकता है जो देश हित में नहीं है. मसलन भारतीय टीम पाकिस्तानियों को हर मैच में धूल चटाएगी, सैनिक पाकिस्तानियों को घुस कर मरेंगे, सैनिकों के सर अपने-आप कटने बंद हो जाएंगे.
  • एक विशेष कार्यक्रम चलाया जा सकता है जिसमें राष्ट्र चेतना के प्रखर गालीवादी लोग सोशल मीडिया पर वामियों और 'हिन्दू हितों के दुश्मनों' को पाठ पढ़ाने के 'गुरबताएंगे. विशेषकर गाली देने का हुनर सिखाया जाएगा.
  • आधुनिक पश्चिमी ज्ञान के स्थान पर वैदिक विज्ञान पर आधारित कार्यक्रम बनाये और दिखाए जायेंगे. इससे देशवासियों के मन में हमारे स्वर्ण अतीत के बारे में स्वाभिमान जगेगा.
  • पाकिस्तान और इस्लाम को सबसे ज्यादा बुरे तरीके से लताडने के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी.
  • एंकर राष्ट्रहितसे जुड़े मामलों का निपटारा खुद टीवी पर ही करेंगे क्योंकि राष्ट्रहित से जुड़े मामलों को लंबित करना सही नहीं माना जाएगा।
  • किसी भी ऐसे सवाल को टीवी पर नहीं दिखाया जाएगा जो संघ परिवार, भाजपा या मोदी को पसन्द न हो या उनके लिए असहज स्थिति पैदा कर सके.
  • राष्ट्रवादी संस्थान में काम करने वाले हर पत्रकार को पश्चिमी परिधानों का परित्याग कर भारतीय वस्त्र पहनने होंगे. महिलाओं को छोटे कपडे छोड़कर साड़ी पहननी होगी. चूँकि लाज महिला का आभूषण है इसीलिए हो सकता है कुछ टीवी चैनल महिला एंकरों का साड़ी के साथ घूँघट भी अनिवार्य कर दें. फिर हम लोग घूँघट वाली संस्कारी एंकर देख सकेंगे.




    • हर समाचार संस्थान के गेट पर भारत माता की विशाल प्रतिमा स्थापित की जाएगी ताकि संस्थान में प्रवेश करते ही राष्ट्रवाद की पर्याप्त खुराक उन्हें मिल जाए. न्यूज़रूम, कैंटीन और यहाँ तक कि वाशरूम में भी भारत माता की फोटो लगाई जाएगी ताकि किसी का राष्ट्रवाद धीमा न पड़ने पाए और कोई भी कामपंथी’ (वामपंथियों को उनके द्वारा दिया गया नाम) न बन सके.
    • दलित, आदिवासी, झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले या समाज के किसी अन्य तबके के लोगों के हित में आवाज़ उठाने वालों को 'वामपंथी' तमगे से नवाज़ने में तनिक भी देरी नहीं लगाई जाएगी. 
    • ऐसे संस्थानों में चाय, काफी की जगह गंगाजल और गौ-मूत्र पिलाई जाएगी.
    • मोदी की चापलूसी एडिटर बनने की विशेष योग्यता होगी. रोज़ शाखा जाने वाले को ही रिपोर्टर बनाया जाएगा.
    • दलितों पर हो रहे किसी भी तरह के अत्याचार को नहीं दिखाया जाएगा क्योंकि इससे वैमनस्य फैलेगा जो देशहित में नहीं है. वैसे भी संघ दलितों के उत्थान के लिए तमाम तरह की योजनायें चला ही रहा है इसलिए मीडिया को इस विषय पर अपना समय व्यर्थ करने की जरूरत नहीं समझी जाएगी.
    • संस्थान के हर कर्मचारी को साल में एक बार लिखित रूप में अविरल देशभक्तिका शपथ पत्र देना होगा. संघ का कोई एक शिविर करना अनिवार्य किया जा सकता है.
    • आदिवासियों पर कोई ग्राउंड रिपोर्ट नहीं की जाएगी क्योंकि राष्ट्र हित में कुछ चीजें दबा लेनी चाहिए. विशेषकर वो जो बहुसंख्यकों के हित में न हों और आदिवासी बहुसंख्यकों के हित में नहीं हैं.
    • मोर्निंग स्लॉट में केवल गीता के उपदेश दिए जाएंगे. किसी और धर्म के उपदेशों को दिखाने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि भारत के सभी लोगों का जड़ सनातन धर्म है. उनके पूर्वज भटक कर दूसरे धर्म में चले गए थे इसीलिए कायदे से वे सभी सनातनी ही हुए और गीता का उपदेश ही उनके लिए हितकारी होगा.
    • सरकार से एक कदम जाकर उसके शानदारयोजनाओं की जानकारी दी जाएगी. जैसे दो हज़ार के नोट में चिप लगाया गया था.
    • गद्दारगाँधी और नेहरू की फोटो न्यूज़रूम से हटाकर वीर सावरकर, गोडसे और बल्लभ भाई पटेल के चित्र लगेंगे. संघ चालक और मोदी तो परम पूज्यनीय होंगे ही.


    सरकार भी नहीं हटेगी पीछे
    सरकार भी देशभक्त पत्रकरों को मदद करने में अपना हाथ पीछे नहीं खींचेगी. उन्हें हर तरह की सुविधाएँ मुहैय्या करायी जाएंगी.
    • मसलन ऐसे 'सपूतों' को सुरक्षा दी जा सकती है. जैसे सुधीर चौधरी को जेड श्रेणी सुरक्षा दी गई है. पत्रकार सुरक्षा घेरे में पत्रकारिता करेंगे.
    • ऐसे पत्रकारोंको प्रेस कांफ्रेंस तक में जाने की जरूरत नहीं  होगी. विज्ञप्ति उनके दफ्तर पहुंचा दी जाएगी.
    • एनडीटीवी जैसे देशद्रोही चैनलों को एक दिन के लिए नहीं हमेशा के लिए बंद किया जाएगा. रवीश जेल जाएंगे.
    • सरकार वरिष्ठ और बड़े नामोंवाले पत्रकारोंकी एक समिति गठित कर सकती है जो संस्थानों के कार्यक्रमों और चाटुकारों’ (अब इन फीचरों के साथ मैं उनको पत्रकार नहीं कह सकता. सॉरी.) को राष्ट्रवादीहोने का प्रमाण पत्र देंगे.

    बढ़िया है न पत्रकारिता का राष्ट्रवादी मॉडल मॉडल?

    1 comment:

    1. Ekdum sachchai hai. sawaasau karod isi jumle me apni apni gardane taan rahe hain ki hum sawaa sau karood hain.....mujhe nhi pta ki o kitne hain pr "ek bharat , sresth bharat" ki sankalpna puri tarah se is rashtravaadi patrikaarita aur rashtravaadiyon ke hi jimme hai. dekhte hain ki o kitne safal hote hain ....dhyaan rahe ki safaltaa ko sirf z security se hi nhi balki unhe milne wale sammano, puraskaaron ,upadhiyon aur anudano ,sahayataaon se bhi aanka janaa chahiye, nhi to ye unke saath bemani hogi...

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