नहीं। देश बनता है उन तमाम लोगों से जो चुप-चाप अपने धुन में मगन, छोटे-बड़े कामों में मस्त हैं। बिना इस बात की परवाह किए कि लोग उनके बारे में क्या
सोचते हैं, क्या कहते हैं। उन्ही तमाम लोगों में है वो सुरीली आँखों वाली लड़की।
बाकी दुनिया से बेफिक्र, मध्यम कद, गोरा बदन, कमर तक लम्बे बाल सुर्ख
लाल गालों वाली वह लड़की जब सुबह - सुबह
तिकोनिया पार्क में योग करती है तो पार्क के किनारे चलते लोगों की निगाहें
बरबस खिंची चली आती हैं. पार्क के किनारे
चना बेचने वाले राजू ने एक दिन बातों - बातों में मुझे बताया की सुबह -सुबह
उसके दुकान पर जो भीड़ लगती है, असल में उसके चाहने वालों की भीड़ है.
मैंने पड़ोस में रहने वाले शर्मा जी को देखा है। वो रोज सुबह-सुबह नातिन को
स्कूल छोड़ने के बाद राजू के दुकान पर चने जरूर खाते हैं। सिपाही की नौकरी के लिए दौड़ वाले लड़के पार्क के के रिंग
रोड का हर चक्कर लगाने के बाद रूककर उसे देख लेना जैसे अपना राष्ट्रीय कर्तव्य
समझते हों। उसके योगा क्लास में 'योगियों' की भीड़ में
लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है। उसके कद्रदानों में हर उम्र, जाति-धर्म
और समुदाय के लोग हैं। जब वह कोबरा पोज़ मारती है तो एक पल के लिए आस-पास जीवन थम सा जाता है। क्या उसे इस बात का इल्म तक होगा कि ठाकुर जोरावर सिंह की
आँखे उसके छरहरे बदन को स्कैन करती हैं। पास खड़े लोग इस बात का इंतज़ार करते रहते
हैं कि कब वह कैमल पोज़ मारे और वे उसके वक्षों का दर्शन करके वे खुद को कृतार्थ कर
सकें।
सारी बातों से बेखबर वो अपने काम में मगन रहती है। सुरीली आँखों वाली
लड़की जाने -अनजाने हमें बहुत कुछ सिखाती है। वह हमें दूसरों के बातों की परवाह किये बगैर अपने काम में मगन रहना सिखाती है। वो हमें सिखाती है कि
देश सेवा केवल 'भारत माता की जय' बोलकर या फेसबुक पर 'संस्कृति
की रक्षा' के लिए झगड़ने से नहीं होता है। अपने हिस्से के काम को ईमानदारी से
करना ही देशसेवा है।
काबिले तारीफ लेखन...
ReplyDeleteThank you bhaiya.
Deleteऔर भईया कैसे हो कभी तो फोन लगालिया करो
ReplyDelete9109833712