उत्तर-प्रदेश सरकार
पॉलीथीन प्रतिबन्ध को भले ही अमल में न ला पायी हो पर नोएडा का बिशनपुरा गाँव पॉलीथीन
मुक्त ग्राम बनने की ओर अग्रसर है| खास बात यह है कि ये अभियान गाँव के लोगों
द्वारा स्वेच्छा से चलाया जा रहा है| अभियान का नेतृत्व करने वाले रिटायर्ड नौसैन्य
कर्मी रणवीर सिंह से अभियान के संदर्भ में बात कर रहें हैं शुभम |
आपको इस तरह का सकारात्मक अभियान चलाने की प्रेरणा कहाँ से मिली?
आज हमारे चारों ओर
जो गन्दगी दिखाई पड़ती है उसमे सबसे बड़ा योगदान पॉलीथीन का है| यह ऐसा अपशिष्ट है
जिसका निस्तारण करना बहुत मुश्किल है| इस समस्या से निबटने के लिए हम लोगों ने अपने
स्तर पर काम करना शुरू किया| बाद में सरकार का फैसला आया जिससे साहस और प्रोत्साहन
मिला|
आपने इस कार्य के लिए लोगों को राजी कैसे किया?
प्रदूषण और इससे
होने वाली बीमारियों से प्रत्येक व्यक्ति परेशान है लेकिन इससे निजात पाने के लिए वह खुद कोई कदम नहीं उठा रहें है| हमने लोगों को
इससे होने वाली हानियों से अवगत कराया| इसके लिए पूरे गाँव में हमने पोस्टर लगवाकर
जागरूकता फैलाई| सबसे खास बात यह है कि इस गाँव की सामाजिक संरचना में तालमेल इतना
अच्छा है कि पूरा गाँव आसानी से एक निर्णय पर पहुँच जाता है|
इस मुहिम के प्रति लोगों में क्या प्रतिक्रिया है?
सबसे पहले तो लोगों
ने यही सवाल उठाया कि बहुत सारी चीजें जो पॉलीथीन में ही आती हैं उनका क्या करें?
हमने लोगों को समझाया कि अपने स्तर पर हम जो कर सकते हैं तो वो तो करें पहले| आप
देखिये तो 60 फीसद पॉलीथीन का प्रयोग कैरी बैग के रूप में होता है| हमारी बात को
लोगों ने माना| इससे हमने गन्दगी के बड़े हिस्से को नियंत्रित कर लिया है|
तो आप पॉलीथीन रैपर्स से कैसे निबटेंगे?
यह तो बड़े स्तर की बात
है| हम तो कहते हैं कि प्लास्टिक बंद कर दो| जब ये नहीं था तब भी तो लोग आराम से
रह रहे थे| इसका कोई दूसरा विकल्प निकल आएगा| वैसे हमने उन चीजों का इस्तेमाल कम
कर दिया है जो पॉलीथीन रैपर्स में आतीं हैं|
बिशनपुरा को आदर्श ग्राम बनाने के लिए आपकी और कौन-कौन सी योजनायें हैं?
देखिये, हम सभी
क्षेत्रों पर ध्यान दे रहें हैं जिसमे कूड़ा निश्तारण, जल निकासी, भूमिगत
विद्युतीकरण के अलावा समाज में बढती दूरी को कम करने एवं सांस्कृतिक पहचान बनाये
रखने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन करेंगे|
सुनने में आ रहा है कि इस मुहिम के जरिये आप चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं|
यह किस हद तक सही है ?
चुनाव का इस मुहिम
से कोई सम्बन्ध नहीं हैं| दोनों चीजें अलग-अलग हैं| सामजिक कार्यों सरोकारों से
हमारा परिवार पहले से ही जुडा रहा है|
देश के अन्य ग्राम पंचायतों को आप क्या सन्देश देना चाहेंगे?
देश की ग्राम
पंचायतों को और अधिक स्वायत्ता और अधिकारों की मांग करनी चाहिए| हाँ, उन्हें पूरे
रोडमैप के साथ काम करना चाहिए जिसमे जनसमर्थन अत्यंत आवश्यक है|
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